कमर पर बांधता है
बैटरी
और माथे पर लैम्प
धरती के सीने को चीर
जाता है ६०० फुट नीचे रोज
जहाँ रात और दिन में
नहीं होता फर्क
उसकी पत्नी
बारह घंटे
आज भी
नहीं हंसती
साँसे नहीं लेतीं
उसके लौट आने तक
बच्चों की आँखें
सूनी रहती हैं उस दौरान
और टिकी रहती है
दरवाजे की सांकल पर
उसके नथुने में
भरा होता गर्द कोयले का
काला स्याह
थोडा होता है बारूद
जिससे ढीली की जाती है
धरती की कसावट
निकालने को कोयला
सुना है
दिन फिरने वाले है
बम्बई में कुछ रिकार्ड टूटे हैं
उनकी कंपनी द्वारा
बहुत धन जुटाया गया है
देश विदेश से
लेकिन
सूरज कहाँ निकलता है
कोयले के धुंए के बादलों की ओट से
सूचकांक के बढ़ने से
नहीं होती कोई हलचल
इस तरफ
यहाँ तो रोज ही चीरना है
धरती की छाती
इनकी सूनी आँखों को
सुना जा सकता है बोलते
'ब्लैक डायमंड तो बस काला पत्थर है हमारे लिए'